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अधिकतर लोग डायबिटीज का मतलब टाइप-2 डायबिटीज ही समà¤à¤¤à¥‡ हैं, लेकिन डायबिटीज मिलेटस (diabetes mellitus) के अंतरà¥à¤—त टाइप-1 डायबिटीज और टाइप-2 डायबिटीज होती है। आपको इन दोनों पà¥à¤°à¤•ारों के बारे में जानकारी होना आवशà¥à¤¯à¤• है। तो यहाठआप आसानी से टाइप 1 और टाइप 2 मधà¥à¤®à¥‡à¤¹ के बीच का अंतर और इनके बीच की समानताओं को समठसकते हैं। साथ ही टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज के लकà¥à¤·à¤£ और उपाय à¤à¥€ जान सकेंगे।
डायबिटीज कà¥à¤¯à¤¾ है?
डायबिटीज मेलिटस à¤à¤• कà¥à¤°à¥‰à¤¨à¤¿à¤• कंडीशन है, जो आपके शरीर में इंसà¥à¤²à¤¿à¤¨ नामक हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ का उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ या उपयोग करने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है। इंसà¥à¤²à¤¿à¤¨ आपके पैंकà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤œ में बीटा (β) सेलà¥à¤¸ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ बनने वाला हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ है। यह आपके रकà¥à¤¤ में मौजूद गà¥à¤²à¥‚कोज की मातà¥à¤°à¤¾ को नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ करने में मदद करता है।
आपके शरीर को खाने से मिलने वाला गà¥à¤²à¥‚कोज आपके रकà¥à¤¤à¤ªà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹ (blood stream) में अवशोषित हो जाता है और आपकी सेलà¥à¤¸ तक पहà¥à¤à¤šà¤¾à¤¯à¤¾ जाता है। गà¥à¤²à¥‚कोज को आपकी सेलà¥à¤¸ में पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ करने के लिठइंसà¥à¤²à¤¿à¤¨ मदद करता है।
डायबिटीज में आपका शरीर इंसà¥à¤²à¤¿à¤¨ को बनाने या उपयोग करने में असमरà¥à¤¥ हो जाता है, जिसके कारण गà¥à¤²à¥‚कोज आपकी कोशिकाओं में पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ नहीं कर पाता है, और आपके खून में ही रह जाता है। इस कारण आपका बà¥à¤²à¤¡ शà¥à¤—र लेवल हाई हो सकता है। आगे डायबिटीज के पà¥à¤°à¤•ार के बारे में जानकारी दी गई है।
इससे पहले कि आप लेख में आगे बà¥à¥‡à¤‚, घर में आराम से बैठकर हमारा Phable à¤à¤ª डाउनलोड करें, ताकि आपको अपने डायबिटीज को मैनेज करने में मदद मिल सके।
टाइप 1 मधà¥à¤®à¥‡à¤¹ कà¥à¤¯à¤¾ है?
टाइप 1 डायबिटीज à¤à¤• ऑटोइमà¥à¤¯à¥‚न डिसऑरà¥à¤¡à¤° है, जहां आपका इमà¥à¤¯à¥‚न सिसà¥à¤Ÿà¤® गलती से आपके पैंकà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤¸ में β-सेलà¥à¤¸ पर हमला करता है और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ नषà¥à¤Ÿ करने लगता है। जिस कारण इंसà¥à¤²à¤¿à¤¨ का उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होता है। इससे आपके शरीर में इंसà¥à¤²à¤¿à¤¨ का उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ कम या बिलà¥à¤•à¥à¤² नहीं होता है।
इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन (International Diabetes Federation or IDF) की रिपोरà¥à¤Ÿ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¤° में डायबिटीज मेलिटस के सà¤à¥€ मामलों में से लगà¤à¤— 5 से 10% टाइप 1 डायबिटीज के केसेस हैं। यह à¤à¤• विकार है, जो मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से छोटे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ (10 वरà¥à¤· से कम आयà¥), किशोरों (10 से 19 वरà¥à¤· की आयॠतक), और यà¥à¤µà¤¾ वयसà¥à¤•ों (19 से 22 वरà¥à¤· की आयॠतक) को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कर सकता है। हालांकि कà¤à¥€-कà¤à¥€ इसका निदान बड़े लोगों में à¤à¥€ किया जा सकता है।
टाइप 2 मधà¥à¤®à¥‡à¤¹ कà¥à¤¯à¤¾ है?
टाइप 2 डायबिटीज à¤à¤• मेटाबॉलिक विकार (metabolic disorder - जब शरीर में असामानà¥à¤¯ केमिकल रिà¤à¤•à¥à¤¶à¤‚स मेटाबॉलिजà¥à¤® पà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥‡à¤¸ में बाधा उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ करते हैं) है। इसमें आपकी सेलà¥à¤¸ आपके पैंकà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤œ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¿à¤¤ इंसà¥à¤²à¤¿à¤¨ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ देने में या इसका उपयोग करने में सकà¥à¤·à¤® नहीं होते हैं। इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ को इनà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤¨ रेजिसà¥à¤Ÿà¥‡à¤‚स या इनà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤¨ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§ (insulin resistance) कहा जाता है, जिस कारण आपके रकà¥à¤¤ में गà¥à¤²à¥‚कोज की मातà¥à¤°à¤¾ बॠजाती है।
आईडीà¤à¤« (IDF) के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¤° में डायबिटीज मेलिटस के 90 से 95% निदान में टाइप 2 डायबिटीज के मामले सामने आठहैं। यह आमतौर पर 45 वरà¥à¤· से अधिक उमà¥à¤° के वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को ही पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है। हालांकि, आजकल की जीवनशैली के कारण यह बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ और किशोरों में à¤à¥€ आम होता जा रहा है।
संकà¥à¤·à¥‡à¤ª में टाइप 1 और टाइप 2 मधà¥à¤®à¥‡à¤¹ के बीच का अंतर जानें
नीचे दी गई टेबल में टाइप 1 और टाइप 2 के बीच अंतर को बताया गया है।
पैरामीटर टाइप 1 डायबिटीज टाइप 2 डायबिटीज
डिसऑरà¥à¤¡à¤° टाइप ऑटोइमà¥à¤¯à¥‚न मेटाबॉलिक
इनà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤¨ पà¥à¤°à¥‹à¤¡à¤•à¥à¤¶à¤¨ नहीं होता है होता है (परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ इनà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤¨ का उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ नहीं होता है)
किस उमà¥à¤° के लोगों को होता है बचà¥à¤šà¥‡, किशोर, यà¥à¤µà¤¾ वयसà¥à¤• आमतौर पर 45 वरà¥à¤· की आयॠसे अधिक
रिसà¥à¤• फैकà¥à¤Ÿà¤° आनà¥à¤µà¤‚शिक (अगर परिवार में किसी को रहा हो) लाइफसà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤², आनà¥à¤µà¤‚शिक (अगर परिवार के किसी सदसà¥à¤¯ को हो) पारिवारिक इतिहास, मेटाबॉलिक सिंडà¥à¤°à¥‹à¤®, आदि।
लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ तेजी से धीरे-धीरे
टà¥à¤°à¥€à¤Ÿà¤®à¥‡à¤‚ट इनà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤¨ ओरल हाइपोगà¥à¤²à¤¿à¤¸à¥‡à¤®à¤¿à¤• दवाइयां, इंसà¥à¤²à¤¿à¤¨ (कà¥à¤› केसेस में)
बचाव समà¥à¤à¤µ नहीं है समà¥à¤à¤µ है
टाइप 1 और टाइप 2 मधà¥à¤®à¥‡à¤¹ के कारण
जैसे कि हमने पहले ही जानकारी दी है कि टाइप 1 डायबिटीज à¤à¤• ऑटोइमà¥à¤¯à¥‚न डिसऑरà¥à¤¡à¤° है, जिसका सही कारण का अà¤à¥€ तक पता नहीं चल पाया है। टाइप 1 डायबिटीज वाले लोग आनà¥à¤µà¤‚शिक संवेदनशीलता (genetic susceptibility - आनà¥à¤µà¤‚शिक या पारिवारिक इतिहास के आधार पर किसी विशेष बीमारी के विकसित होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾) के साथ पैदा होते हैं।
यह कंडीशन परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£à¥€à¤¯ कारकों जैसे केमिकलà¥à¤¸, वायरस आदि के संपरà¥à¤• में आने के कारण टà¥à¤°à¤¿à¤—र हो जाती है। टाइप 1 डायबिटीज आपके पैंकà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤œ में इंजà¥à¤°à¥€ के कारण à¤à¥€ हो सकती है।
टाइप 2 डायबिटीज, à¤à¤• मेटाबोलिक विकार है जो खराब जीवनशैली के कारण हो सकती है। नीचे दिठनिमà¥à¤¨ कारणों से टाइप 2 डायबिटीज होने का रिसà¥à¤• बढ़ सकता है, जैसे:
शारीरिक गतिविधि की कमी
अधिक वजन या मोटापा
अनहेलà¥à¤¦à¥€ डाइट
मधà¥à¤®à¥‡à¤¹ का पारिवारिक इतिहास होना
45 वरà¥à¤· से अधिक आयॠका होना
मेटाबोलिक सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® (हाई बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤°, हाई कोलेसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤², पेट में à¤à¤•à¥à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾ फैट)
धूमà¥à¤°à¤ªà¤¾à¤¨
अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• शराब का सेवन
जेसà¥à¤Ÿà¥‡à¤¶à¤¨à¤² डायबिटीज (gestational diabetes - गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में होने वाला डायबिटीज)
पॉलीसिसà¥à¤Ÿà¤¿à¤• ओवरी सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® ( Polycystic ovary syndrome - ओवरी से संबंधित समसà¥à¤¯à¤¾)
टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज होने के जोखिम कारक
कà¥à¤› कारक à¤à¥€ होते हैं, जो टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज का जोखिम पैदा कर सकते हैं। ये जोखिम कारक कà¥à¤›-कà¥à¤› कारणों से मिलते-जà¥à¤²à¤¤à¥‡ à¤à¥€ हो सकते हैं। ये जोखिम कारक निमà¥à¤¨ हैं:
टाइप 1 डायबिटीज:
जेनेटिकà¥à¤¸ या पारिवारिक इतिहास - अगर परिवार में किसी को डायबिटीज हो। खासतौर से माता-पिता या à¤à¤¾à¤ˆ-बहन को अगर डायबिटीज रहा हो।
उमà¥à¤° - यह किसी à¤à¥€ उमà¥à¤° में हो सकती है, लेकिन अधिकतर पहली बार 4-7 साल के बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में टà¥à¤°à¤¿à¤—र हो सकती है। वहीं, दूसरी बार 10 से 14 साल के बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के बीच टà¥à¤°à¤¿à¤—र हो सकती है।
टाइप 2 डायबिटीज:
ओबेसिटी या मोटापा
शारीरिक रूप से à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µ न रहना
पारिवारिक इतिहास
यह à¤à¥€ किसी à¤à¥€ उमà¥à¤° में हो सकती है, लेकिन अधिकांशतः 45 वरà¥à¤· की उमà¥à¤° के बाद विकसित हो सकती है।
पà¥à¤°à¥€à¤¡à¤¾à¤¯à¤¬à¤¿à¤Ÿà¥€à¤œ
अधिक टà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤—à¥à¤²à¥€à¤¸à¥‡à¤°à¤¾à¤‡à¤¡ (triglycerides - à¤à¤• तरह का फैट) का बà¥à¤¨à¤¾ और अचà¥à¤›à¥‡ कोलेसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤² (High-density lipoprotein - HDL) का कम होना।
जेसà¥à¤Ÿà¥‡à¤¶à¤¨à¤² डायबिटीज यानी गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में अगर डायबिटीज हà¥à¤† हो।
यदि आपने 9 पाउंड (4 किलोगà¥à¤°à¤¾à¤®) से अधिक वजन वाले बचà¥à¤šà¥‡ को जनà¥à¤® दिया है।
पोलियसà¥à¤Ÿà¤¿à¤• ओवरी सिंडà¥à¤°à¥‹à¤®
टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज के लकà¥à¤·à¤£
अब हम आपको टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज के लकà¥à¤·à¤£ और उपाय बताà¤à¤à¤—े, ताकि आप आसानी से इसका पता लगाकर सही वकà¥à¤¤ पर इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ मैनेज कर सकें। टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज में लगà¤à¤— समान लकà¥à¤·à¤£ होते हैं, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि जो à¤à¥€ लकà¥à¤·à¤£ होते हैं वो हाई बà¥à¤²à¤¡ शà¥à¤—र लेवल के कारण ही होते हैं।
अधिक पà¥à¤¯à¤¾à¤¸ लगना (polydipsia )
बार-बार पेशाब आना (polyuria)
à¤à¥‚ख में वृदà¥à¤§à¤¿ और बार-बार खाना (polyphagia)
अचानक वजन घटना
चिड़चिड़ापन और मूड में बदलाव
तà¥à¤µà¤šà¤¾ डà¥à¤°à¤¾à¤ˆ होना
अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• थकान लगना
धà¥à¤‚धला दिखाई देना
घाव का धीरे-धीरे ठीक होना
बार-बार इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ संकà¥à¤°à¤®à¤£ होना
टाइप 1 मधà¥à¤®à¥‡à¤¹ और टाइप 2 मधà¥à¤®à¥‡à¤¹ का निदान कैसे करें?
टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज में हाई बà¥à¤²à¤¡ शà¥à¤—र लेवल के निदान के लिठटेसà¥à¤Ÿ समान हैं।
गà¥à¤²à¤¾à¤‡à¤•ोसिलेटेड हीमोगà¥à¤²à¥‹à¤¬à¤¿à¤¨ टेसà¥à¤Ÿ (hemoglobin A1c test - HbA1c)
फासà¥à¤Ÿà¤¿à¤‚ग बà¥à¤²à¤¡ शà¥à¤—र टेसà¥à¤Ÿ (Fasting Blood Sugar Test - FBS)
रैंडम बà¥à¤²à¤¡ शà¥à¤—र टेसà¥à¤Ÿ (Random Blood Sugar - RBS)
ओरल गà¥à¤²à¥‚कोज टॉलरेंस टेसà¥à¤Ÿ (Oral Glucose Tolerance Test - OGTT)
पोसà¥à¤Ÿà¤ªà¥à¤°à¥ˆà¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤¯à¤² शà¥à¤—र टेसà¥à¤Ÿ (Post Prandial Blood Sugar Test- PPBS)
वहीं, इन टेसà¥à¤Ÿ को करने के बाद खासतौर से टाइप 1 डायबिटीज के निदान को कनà¥à¤«à¤°à¥à¤® करने के लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° नीचे बताठगठटेसà¥à¤Ÿ का सà¥à¤à¤¾à¤µ दे सकते हैं:
सी-पेपà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤¡ टेसà¥à¤Ÿ (C-peptide Test) - सी-पेपà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤¡ इंसà¥à¤²à¤¿à¤¨ के साथ अगà¥à¤¨à¥à¤¯à¤¾à¤¶à¤¯ में बनने वाला पदारà¥à¤¥ है। टाइप 1 मधà¥à¤®à¥‡à¤¹ में, आपका अगà¥à¤¨à¥à¤¯à¤¾à¤¶à¤¯ बहà¥à¤¤ कम इंसà¥à¤²à¤¿à¤¨ या सी-पेपà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤¡ बनाता है। à¤à¤¸à¥‡ में इसका पता लगाने के लिठयह टेसà¥à¤Ÿ कराने की सलाह दी जाती है।
आइलेट ऑटोà¤à¤‚टीबॉडी टेसà¥à¤Ÿ (Islet Autoantibodies Test) - टाइप 1 डायबिटीज में आइलेट ऑटोà¤à¤‚टीबॉडी टेसà¥à¤Ÿ रिजलà¥à¤Ÿ पॉजिटिव होता है और टाइप 2 डायबिटीज में नेगेटिव होता है।
कीटोन टेसà¥à¤Ÿ (Ketone Test) - अगर आपके यूरिन यानी पेशाब में कीटोनà¥à¤¸ (फैट के टूटने के कारण बनने वाला पदारà¥à¤¥) की मातà¥à¤°à¤¾ अधिक होती है तो यह टाइप 1 डायबिटीज को दरà¥à¤¶à¤¾à¤¤à¤¾ है।
टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज के उपचार या उपाय
1. टाइप 1
टाइप 1 डायबिटीज का à¤à¤•मातà¥à¤° उपचार इंसà¥à¤²à¤¿à¤¨ इंजेकà¥à¤¶à¤¨ है।
हेलà¥à¤¦à¥€ डाइट, नियमित वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® और सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ जीवन शैली की आदतें, इस कंडीशन को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ ढंग से मैनेज करने में मदद कर सकती हैं।
2. टाइप 2
टाइप 2 डायबिटीज को मैनेज करने के लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ दिठगठमेडिकेशनà¥à¤¸ या ओरल हाइपोगà¥à¤²à¤¾à¤‡à¤¸à¥‡à¤®à¤¿à¤• दवाइयां लें।
डायबिटीज के अनà¥à¤•ूल डाइट
नियमित शारीरिक à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µà¤¿à¤Ÿà¥€
वेट मैनेजमेंट
अनà¥à¤¯ हेलà¥à¤¦à¥€ लाइफ सà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤² चेंजेस जैसे - समय पर सोना-उठना, हेलà¥à¤¦à¥€ खाना शामिल हो सकते हैं।
टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज की जटिलताà¤à¤‚
टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज दोनों की जटिलताà¤à¤‚ लगà¤à¤— समान हैं, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि ये हाई बà¥à¤²à¤¡ शà¥à¤—र लेवल के कारण होती हैं। समय के साथ, हाई बà¥à¤²à¤¡ शà¥à¤—र लेवल आपकी बà¥à¤²à¤¡ वेसलà¥à¤¸ को नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चा सकता है, जिससे निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित जटिलताà¤à¤‚ हो सकती हैं।
सà¥à¤•िन इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨
अंगों में रकà¥à¤¤ का पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹ कम हो सकता है
ठीक से दिखाई न देना
दरà¥à¤¦, à¤à¥à¤¨à¤à¥à¤¨à¥€, सà¥à¤¨à¥à¤¨à¤¤à¤¾ होना (पेरीफेरल नà¥à¤¯à¥‚रोपैथी)
किडनी फेल होना (डायबिटिक नेफà¥à¤°à¥‹à¤ªà¥ˆà¤¥à¥€)
हृदय रोग
सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤•
à¤à¤¨à¥à¤¯à¥‚रिजà¥à¤® (Aneurism - धमनी से जà¥à¥œà¥€ समसà¥à¤¯à¤¾)
टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज में अनà¥à¤¯ शारà¥à¤Ÿ टरà¥à¤® कॉमà¥à¤ªà¥à¤²à¥€à¤•ेशनà¥à¤¸ हो सकते हैं, जैसे- हाइपोगà¥à¤²à¤¾à¤‡à¤¸à¥‡à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ (Hypoglycemia - लो बà¥à¤²à¤¡ गà¥à¤²à¥‚कोज लेवल) और डायबिटीज कीटोà¤à¤¸à¤¿à¤¡à¥‹à¤¸à¤¿à¤¸ (diabetic ketoacidosis - शरीर में इंसà¥à¤²à¤¿à¤¨ के कम होने के कारण पैदा होने वाली गंà¤à¥€à¤° सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿, जिस कारण रकà¥à¤¤ में कीटोनà¥à¤¸ का सà¥à¤¤à¤° बॠजाता है)। इलाज न होने पर ये गंà¤à¥€à¤° सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ बन सकती है।
कà¥à¤¯à¤¾ टाइप 1 और टाइप 2 मधà¥à¤®à¥‡à¤¹ से बचा जा सकता है?
टाइप 1 डायबिटीज: à¤à¤¸à¥‡ तो वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ में टाइप 1 डायबिटीज को रोकने का कोई तरीका नहीं है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इस कंडीशन का कारण अà¤à¥€ à¤à¥€ अजà¥à¤žà¤¾à¤¤ है। इसमें अपनी सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ और डॉकà¥à¤Ÿà¤° दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ बताये गठदवाइयों को लेना ही à¤à¤• मातà¥à¤° उपाय हो सकता है।
टाइप 2 डायबिटीज: संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार, नियमित वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤®, वेट मैनेजमेंट, सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤¸ मैनेजमेंट, धूमà¥à¤°à¤ªà¤¾à¤¨ और शराब छोड़ कर हेलà¥à¤¦à¥€ लाइफ सà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤² अपनाकर टाइप 2 डायबिटीज से बचा जा सकता है।
आशा करते हैं कि टाइप 1 और टाइप 2 मधà¥à¤®à¥‡à¤¹ के बीच का अंतर अब आपको समठआ गया होगा। धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें टाइप 1 हो या टाइप 2 डायबिटीज हो, ये दोनों ही कंडीशन सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ के लिठहानिकारक हो सकता है। à¤à¤¸à¥‡ में आपको नियमित (regularly) अपना बà¥à¤²à¤¡ शà¥à¤—र लेवल चेक कराते रहना चाहिà¤à¥¤ नियमित शारीरिक à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µà¤¿à¤Ÿà¥€, और सही डाइट व रूटीन फॉलो करना चाहिà¤, ताकि आप डायबिटीज से अपना बचाव कर सकें या अपनी डायबिटीज को मैनेज कर सकें।
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